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Tuesday 21st of August 2018
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सूरए माएदा की तफसीर

सूरए माएदा की तफसीर
कुरआने मजीद के पांचवें सूरे का नाम माएदा है। माएदा का अर्थ दस्तरखान होता है और चूंकि इस सूरे में उस घटना का वर्णन है जिसमें हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम ने ईश्वरीय भोजन और ...

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय

हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम का जीवन परिचय
नाम व लक़ब (उपाधियां) आपका नाम मुहम्मद व आपका मुख्य लक़ब बाक़िरूल उलूम है। जन्म तिथि व जन्म स्थान हज़रत इमाम बाक़िर अलैहिस्सलाम का जन्म सन् 57 हिजरी मे रजब मास की प्रथम तिथि ...

हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ) के नूरानी अक़वाल

हज़रत इमाम मोहम्मद बाक़िर (अ) के नूरानी अक़वाल
ऐसे कुछ लोग हैं जो दुनिया के लालची हैं और उन्हों ने अपनी ख़ाहिशात को भी हासिल कर लिया हैं यहाँ तक कि उस काम का अंजाम बद नसीबी और नाकामी है। इसी के साथ ऐसा भी होता है कि कुछ लोग ...

इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम का जन्म दिवस

इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम का जन्म दिवस
आज पवित्र नगर मदीना में इमाम सज्जाद अलैहिस्सलाम का घर प्रकाशवान है। पूरा मदीना नगर इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम के सुपुत्र इमाम मोहम्मद बाक़िर अलैहिस्सलाम के आगमन से ...

सूरए आराफ़ की तफसीर 2

सूरए आराफ़ की तफसीर 2
सूरए आराफ़ की आयत संख्या 31 और 32 में ईश्वर कहता है।  हे आदम की संतानो! हर मस्जिद के निकट (उपासना के समय) अपनी शोभा को धारण कर लो और खाओ पियो परंतु अपव्यय न करो कि ईश्वर अपव्यय ...

सूर –ए- माएदा की तफसीर 2

सूर –ए- माएदा की तफसीर 2
सूरे माएदा की आयत संख्या 27 से 31 धरती पर पहले मनुष्य व पहले ईश्वरीय दूत हज़रत आदम और उनके दो बेटों में से एक के दूसरे के हाथों क़त्ल किए जाने की घटना की ओर संकेत करती है। आयत ...

सूरए आले इमरान की तफसीर

सूरए आले इमरान की तफसीर
पवित्र क़ुरआन के सूरए आले इमरान में आया है कि अलिफ़ लाम मीम, अल्लाह जिसके अतिरिक्त कोई ईश्वर नहीं है और वह सदैव जीवित है और हर वस्तु उसी की कृपा से स्थापित है। उसने आप पर वह ...

हज़रत यूसुफ और जुलैख़ा के इश्क़ की कहानी क़ुरआन की ज़बानी 2

हज़रत यूसुफ और जुलैख़ा के इश्क़ की कहानी क़ुरआन की ज़बानी 2
इससे पहले वाली कड़ी में हम ने उल्लेख किया था कि हज़रत यूसुफ़ (अ) को निर्दोष होने के बावजूद जेल में डाल दिया गया। दो और युवाओं को भी उसी समय हज़रत यूसुफ़ के साथ जेल में डाला ...

सूर –ए- आराफ़ की तफसीर 1

सूर –ए- आराफ़ की तफसीर 1
सूरए आराफ़ पवित्र क़ुरआन का सातंवा सूरा है। यह सूरा मक्का में उतरा। यह सूरा जिस समय उतरा उस समय तक पैग़म्बरे इस्लाम सल्लल लाहो अलैहि व आलेही व सल्लम ने मदीना पलायन नहीं ...

सूर - ए - बक़रा की तफसीर 2

सूर - ए - बक़रा की तफसीर 2
पवित्र क़ुरआन का सबसे बड़ा सूरा सूरए बक़रह है जिसमें 286 आयते हैं। इस सूरे के उतरने से नवस्थापित इस्लामी समाज से संबंधित ज़रूरी मामले स्पष्ट हुए और मुसलमानों को ज्ञात हुआ कि ...

इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम की अहादीस

इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम की अहादीस
यहां पर अपने प्रियः अध्ययन कर्ताओं के अध्ययन हेतू हज़रत इमाम तक़ी अलैहिस्सलाम के चालीस मार्ग दर्शक कथन प्रस्तुत किये जारहे है। 1-मोमिन की तीन अवश्यक्ताऐं हज़रत इमाम तक़ी ...

इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम

इमाम मोहम्मद तक़ी अलैहिस्सलाम
हिजरी क़मरी कैलेंडर के सातवें महीने रजब को उपासना और अराधना का महीना कहा जाता है जबकि इस पवित्र महीने के कुछ दिन पैग़म्बरे इस्लाम के परिजनों में कुछ महान हस्तियों से जुड़े ...

इमाम तक़ी अ.स. का एक मुनाज़ेरा

इमाम तक़ी अ.स. का एक मुनाज़ेरा
इमाम रज़ा अ.स. को शहीद करने के बाद मामून चाहता था कि किसी तरह से इमाम तक़ी अ.स. पर भी नज़र रखे और इस काम के लिये उसने अपनी बेटी उम्मे फ़ज़्ल का निकाह इमाम तक़ी  से करना चाहा। इस बात पर ...

सूर - ए - बक़रा की तफसीर 3

सूर - ए - बक़रा की तफसीर 3
पवित्र क़ुरआन का सबसे बड़ा सूरा सूरए बक़रह है जिसमें 286 आयते हैं। इस सूरे के उतरने से नवस्थापित इस्लामी समाज से संबंधित ज़रूरी मामले स्पष्ट हुए और मुसलमानों को ज्ञात हुआ कि ...

क्या क़ुरआन दस्तूर है?

क्या क़ुरआन दस्तूर है?
वाज़ेह रहना चाहिये के जिस तरह क़ुरआन आम किताबों की तरह की किताब नही है। इसी तरह आम दसातीर की तरह का दस्तूर भी नही है। दस्तूर का मौजूदा तसव्वुर क़ुरआन मजीद पर किसी तरह सादिक़ ...

क़ुरआन नहजुल बलाग़ा के आइने में

क़ुरआन नहजुल बलाग़ा के आइने में
(यह मक़ाला हज़रत आयतुल्लाह मिस्बाह यज़दी और "क़ुरआन और आईन ए नहजुल बलाग़ा ”से एक इन्तेख़ाब है)(1) क़ुरआने करीम की अहमियत व मौक़ेईयत:इस वक्त क़ुरआन करीम ही एक आसमानी किताब है ...

कुरआन की फ़साहत व बलाग़त

कुरआन की फ़साहत व बलाग़त
अल्लाह के पवित्र कुरआन मजीद, और प्रसिद्ध ग्रंथ एक ज्ञान व हुनर, फ़िक्री व अक़ली, मददी व मानबी के व्यतीत एक आसमानी मोज़ेज़ा भी है, क्योंकी कुरआन मजीद बूलन्द ध्वनी के साथ ...

कुरआन मे परिवर्तन नहीं हुआ

कुरआन मे परिवर्तन नहीं हुआ
इस चीज़ में कोई शक नहीं है, कि पृथ्वी के समस्त प्रकार मुसलमान प्रसिद्ध व पवित्र ग्रंथ कुरआनमजीद पर एक विशेष यक़ीन रख़ते है।बेसत शुरु होने से पहले विभिन्न क़ौम और दलो के ...

तावील पर तफ़सीरे अल मीज़ान का दृष्टिकोण

तावील पर तफ़सीरे अल मीज़ान का दृष्टिकोण
तावील का माद्दा ال یوول ای رجع رجوعا है और लौटने के मायना में है अत: तावील जो मज़ीद फ़ी है उसका अर्थ इरजा यानी लौटाना है। इरजा हर चीज़ के लिये लौटाने को कहते हैं और तावील केवल ...

क़ुरआने करीम की अहमियत व मौक़ेईयत

क़ुरआने करीम की अहमियत व मौक़ेईयत
इस वक्त क़ुरआन करीम ही एक आसमानी किताब है जो इन्सान की दस्तरस में है।नहजुल बलाग़ा में बीस से ज़ियादा ख़ुतबात हैं जिन में क़ुरआने मजीद का तआर्रुफ़ और उस की अहमियत व ...