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Thursday 22nd of November 2018
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चेहलुम के दिन की ज़ियारत हिन्दी अनुवाद के साथ

चेहलुम के दिन की ज़ियारत हिन्दी अनुवाद के साथ
सफ़र महीने की बीसवी तारीख़ को इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत के लिए दो तरीक़े बयान किए गए हैं पहला तरीक़ा वह है जिसे शेख़ तूसी ने तहज़ीब और मिस्बाह नामक किताबों में सफ़वान जम्माल ...

आमाले लैलतुल रग़ा'ऐब

आमाले लैलतुल रग़ा'ऐब
लैलतुल रग़ा'ऐब - रजब की पहली शबे जुमा (नौचंदी जुमारात) मोहम्मदे मुस्तफ़ा(स.अ) नें फ़रमाया कि :रजब की पहली शबे जुमा से ग़ाफ़्लि ना होना कि इसे फ़रिशते लैलतुल रग़ा'ऐब कहते हैं । ...

हज़रत इमाम महदी (अ. स.) ग़ैरों की नज़र में

हज़रत इमाम महदी (अ. स.) ग़ैरों की नज़र में
सच्चाई वह है जिसका इक़रार दुश्मन भी करे। इमाम महदी (अ. स.) के विश्वव्यापी आंदोलन का उल्लेख सिर्फ़ शिया किताबों में ही नही बल्कि दूसरे इस्लामी फिरकों की एतेक़ादी किताबों में ...

मस्जिदे मुकद्दसे जमकरान

मस्जिदे मुकद्दसे जमकरान
बिस्मिल्ला हिर्रहमा निर्रहीम वह मक़ामात जो हजरत इमाम महदी अलैहिस्सलाम की तवज्जोह का मरकज़ रहे हैं उनमें से एक मस्जिदे जमकरान भी है। यह मस्जिद चूँकि जमकरान नामक गाँव के ...

इमाम अली नक़ी (अ.) की ज़िंदगी पर एक संक्षिप्त नज़र।

इमाम अली नक़ी (अ.) की ज़िंदगी पर एक संक्षिप्त नज़र।
इमाम अली नक़ी (अ.) ने इस्लामी अहकाम के प्रसारण व प्रकाशन और जाफ़री मज़हब के प्रचार के लिए महत्वपूर्ण क़दम उठाये। और हमेशा लोगों को धार्मिक तथ्यों से अवगत करने में ...

इमाम असकरी अलैहिस्सलाम और उरूजे फिक्र

इमाम असकरी अलैहिस्सलाम और उरूजे फिक्र
आले मौहम्मद अलैहेमुस्सलाम जो उरूजे फिक्र मे खास मक़ाम रखते है और इमाम हसन असकरी अलैहिस्सलाम उन्ही हज़रात मे की एक कड़ी है।   शिया सुन्नी दोनो के उलामा ने लिखा है कि एक दिन ...

शबे आशूर के आमाल

शबे आशूर के आमाल
अल्लाह पाक व पाकीज़ा है सारी तारीफ़ उसी अल्लाह के लिए है अल्लाह के अतिरिक्त कोई माबूद (जिसकी इबादत की जाए) नहीं है अल्लाह सबसे बड़ा है और उसके अतिरिक्त किसी के पास कोई ताक़त ...

माहे ज़ीक़ाद के इतवार के दिन की नमाज़

माहे ज़ीक़ाद के इतवार के दिन की नमाज़
ये महीना हुरमत वाले महीनो के शूरू होने का महीना है कि जिनका ज़िक्र परवरदिगार ने क़ुरआने करीम मे किया है। सैय्यद इब्ने ताऊस एक रिवायत नक़्ल करते है कि ज़ीक़ाद का महीना सख्त ...

अक़्ल और अख़लाक

अक़्ल और अख़लाक
अक़्ल और अख़लाक पैग़म्बरे इस्लाम (स.) ने फ़रमायाः احسنكم عقلا احسنكم خلقا तुम में सबसे ज़्यादा अक़्लमंद वह है जो तुम में सबसे ज़्यादा खुश अख़लाक़ है। अक़्ल व खुश अखलाक़ी और इन ...

नसीहतें

नसीहतें
वह रंज और ज़हमते जो सालिके मोमिन अहयाए दीने ख़ुदा और मकतबे अहले बैत अलैहिमुस्सलाम में बर्दाश्त करता है इस से उसके अन्दर जहाँ ज़रफ़ियत का इज़ाफ़ा होता है वहीँ दुनिया से ...

इमामे असकरी अलैहिस्सलाम की शहादत

इमामे असकरी अलैहिस्सलाम की शहादत
उस समय अब्बासी शासक मोतमिद के हाथ में सत्ता थी। वह सोचता या कि इमाम हसन अस्करी अलैहिस्सलाम को अपने मार्ग से हटाकर वह उनकी याद को भी लोगों के मन से मिटा देगा और वे सदैव के लिए ...

इमामे हसन असकरी(अ)

इमामे हसन असकरी(अ)
नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ) हज़रत इमाम अस्करी अलैहिस्सलाम का नाम हसन व आपकी मुख्य उपाधि अस्करी है। जन्म व जन्म स्थान हज़रत इमाम अस्करी अलैहिस्सलाम का जन्म सन् 232 हिजरी क़मरी ...

हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस पर विशेष

हज़रत इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के जन्म दिवस पर विशेष
आज एक मूल्यवान हस्ती का जन्मदिवस है। आज के दिन पूर्वोत्तरी ईरान में स्थित प्रकाशमयी रौज़े की ओर मन लगे हुए हैं और पवित्र नगर मश्हद में सदाचारियों के वंश से एक आध्यात्मिक ...

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का ज्ञान

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम का ज्ञान
मामून जो कि इमाम की तरफ़ लोगो की बढ़ती हुई मोहब्बत और लोगों के बीच आपके सम्मान को देख रहा था और आपके इस सम्मान को कम करने और लोगों के प्रेम में ख़लल डालने के लिए उसने बहुत से ...

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के ज़माने के राजनीतिक हालात का वर्णन

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम के ज़माने के राजनीतिक हालात का वर्णन
इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की इमामत वाला जीवन बीस साल का था जिसको हम तीन भागों में बांट सकते हैं। 1. पहले दस साल हारून के ज़माने में 2. दूसरे पाँच साल अमीन की ख़िलाफ़त के ज़माने ...

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत

इमाम रज़ा अलैहिस्सलाम की शहादत
इमाम अली रज़ा अलैहिस्सलाम की बहुत उपाधियां हैं जिनमें सबसे प्रसिद्ध रज़ा है जिसका अर्थ है राज़ी व प्रसन्न रहने वाला। इस उपाधि का बहुत बड़ा कारण यह है कि इमाम महान ईश्वर की ...

पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.अ:व:व) का जीवन परिचय

पैगम्बरे इस्लाम हज़रत मोहम्मद (स.अ:व:व) का जीवन परिचय
नाम व अलक़ाब (उपाधियाँ) आपका नाम मुहम्मद इब्ने अब्दुल्लाह व आपके अलक़ाब मुस्तफ़ा, अमीन, सादिक़,इत्यादि हैं।   माता पिता हज़रत पैगम्बर के पिता का नाम अब्दुल्लाह था जो ...

हर रोज़ एक नया क़दम

हर रोज़ एक नया क़दम
अज़ीज़ो ! किसी भी वुजूद के ज़िंदा होने की सब से आसान और साफ़ निशानी उसका नमुव्व व रुश्द करना है। जब भी उसका नमुव्व रुक जाये समझलो कि उसकी मौत का ज़माना क़रीब आ गया है। और जब भी ...

वसवसों से मुक़ाबला

वसवसों से मुक़ाबला
अज़ीज़ो ! रूहो रवान का सकून , यह एक ऐसा गोहरे बे बहा है जिसको हासिल करने के लिए ख़लील उल अल्लाह (हज़रत इब्राहीम अ.) कभी आसमाने मलाकूत की तरफ़ देखते थे और कभी ज़मीन पर नज़र करते ...

तक़वा और पाकदामनी

तक़वा और पाकदामनी
इमाम अली (अ) फ़रमाते हैं واعلم يابنی ان احب ما انت آخذ به الِِی من وصِتی تقوِِ ی الله बेटा जान लो कि मेरे नज़दीक सबसे ज़्यादा प्रिय चीज़ इस वसीयत नामे में अल्लाह का तक़वा है तुम उसे अपनाये ...