Hindi
Friday 23rd of February 2018
code: 81466

जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर इमाम अली का खुत्बा

जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर इमाम अली का खुत्बा



इमाम अली ने ये कलेमात सैय्यदतुन निसाइल आलमीन फ़ातेमा ज़हरा (स0) के दफ़्न के मौक़े पर पैग़म्बरे इस्लाम (स0) से राज़दाराना गुफ़्तगू के अन्दाज़ मे कहे  थे।

 

सलाम हो आप पर ऐ ख़ुदा के रसूल (स0) !

 

मेरी तरफ़ से और आपकी उस दुख़्तर की तरफ़ से जो आपके जवार में नाज़िल हो रही है और बहुत जल्दी आप से मुलहक़ हो रही है।

 

या रसूलल्लाह! मेरी क़ूवते सब्र आपकी मुन्तख़ब रोज़गार (बरगुज़ीदा) दुख़्तर के बारे में ख़त्म हुई जा रही है और मेरी हिम्मत साथ छोड़े दे रही है सिर्फ़ सहारा यह है के मैंने आपके फ़िराक़ के अज़ीम सदमे और जानकुन हादसे पर सब्र कर लिया है तो अब भी सब्र करूंगा कि मैंने ही आपको क़ब्र में उतारा था और मेरे ही सीने पर सर रखकर आपने इन्तेक़ाल फ़रमाया था।

 

बहरहाल मैं अल्लाह ही के लिये हूँ और मुझे भी उसी की बारगाह में वापस जाना है।

 

आज अमानत वापस चली गई और जो चीज़ मेरी तहवील में थी वह मुझसे छुड़ा ली गई। अब मेरा रंज व ग़म दायमी है और मेरी रातें नज़रे बेदारी हैं।

 

जब तक मुझे भी परवरदिगार उस घर तक न पहुंचा दे जहाँ आपका क़याम है।

 

अनक़रीब आपकी दुख़्तरे नेक अख़्तर उन हालात की इत्तेला देगी कि किस तरह आपकी उम्मत ने उस पर ज़ुल्म ढ़ाने के लिये इत्तेफ़ाक़ कर लिया था। आप उससे मुफ़स्सिल सवाल फ़रमाएं और जुमला हालात दरयाफ़्त करें।


अफ़सोस कि यह सब उस वक़्त हुआ है जब आपका ज़माना गुज़रे देर नहीं हुई है और अभी आपका तज़किरा बाक़ी है। मेरा सलाम हो आप दोनों पर, उस शख़्स का सलाम जो रूख़सत करने वाला है और दिल तंग व रंजीदा नहीं है।

 

मैं अगर इस क़ब्र से वापस चला जाऊं तो यह किसी दिले तंगी का नतीजा नहीं है और अगर यहीं ठहर जाऊं तो यह उस वादे के बेऐतबारी नहीं है जो परवरदिगार ने सब्र करने वालों से किया है।

(नहजुल बलाग़ाः खुत्बा न. 202)

latest article

  सुन्नियों की पुस्तकें और फ़ातेमा ...
  जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर ...
  माहे रजब की दुआऐं
  हज़रत फ़ातेमा ज़हरा उम्महातुल ...
  सुन्नियों की पुस्तकें और फ़ातेमा ...
  जनाबे फ़ातेमा ज़हरा के दफ़्न के मौक़े पर ...
  फ़िदक और हज़रत फ़ातेमा ज़हरा
  हज़रत फ़ातेमा की शहादत
  वुज़ू के वक़्त की दुआऐ
  मुस्लिम बिन अक़ील अलैहिस्सलाम

user comment